
पंजाब के गांव देश में सबसे अधिक विकसित होंगे; सरपंचों को आगे बढ़कर बदलाव का नेतृत्व करना चाहिए: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
*पंजाब के गांव देश में सबसे अधिक विकसित होंगे; सरपंचों को आगे बढ़कर बदलाव का नेतृत्व करना चाहिए: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान*
• सरकार गांवों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है और फंडों की कभी कमी नहीं होने दी जाएगी : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
• विकसित गांव पंजाब को देश का सबसे विकसित राज्य बनाएंगे : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
• सरपंचों को फंडों का उपयोग इस प्रकार करना चाहिए, जिससे समाज के हर वर्ग को लाभ मिले: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
• महिला सरपंचों को स्वयं को सीमित नहीं रखना चाहिए और राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
• मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बठिंडा में सरपंचों से बातचीत की और उनके काम की सराहना की
बठिंडा; 23 जून:
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज सरपंचों को ग्रामीण पंजाब के बदलाव का नेतृत्व करने का आह्वान किया और स्पष्ट किया कि पंजाब को देश का सबसे विकसित राज्य बनाने के सपने को साकार करने के लिए राज्य के गांव देश में सबसे अधिक विकसित होकर उभरने चाहिए। रामपुरा फूल और तलवंडी साबो के सरपंचों और पंचों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने दोहराया कि पंजाब सरकार गांवों के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और इस कार्य के लिए फंडों की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने पंचायतों से अपील की कि वे सरकारी फंडों का उपयोग इस प्रकार करें, जिससे समाज के हर वर्ग को लाभ मिले, जबकि शिक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचे और सतत विकास को प्राथमिकता दी जाए।
मुख्यमंत्री ने गांवों के विकास और सिंचाई से संबंधित मुद्दों की भी समीक्षा की और किसानों के लिए नहरी पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने और पंजाब की प्रगति एवं समृद्धि की गति को तेज करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।
सरपंच मिलनी की कुछ झलकियाँ एक्स पर साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "रामपुरा फूल और तलवंडी साबो के सरपंचों और पंचों के साथ बैठक के दौरान पंजाब सरकार की उपलब्धियों के बारे में चर्चा की गई। सभी ने पूरी तरह से मेरिट के आधार पर नौकरियाँ देने और शिक्षा के मानक को सुधारने के लिए सरकार के प्रयासों का स्वागत किया। ग्रामीण विकास और किसानों के लिए नहरी पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के बारे में भी विचार-विमर्श किया गया। पंजाब के विकास और प्रगति का यह सफर निरंतर जारी रहेगा।"
'सरपंच मिलनी' के दौरान सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य में सबसे कठिन चुनाव सरपंच का होता है क्योंकि वही जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़े होते हैं। उन्होंने कहा, "सरपंच गांव का मुखिया होता है और एक अच्छा सरपंच गांव की सूरत बदल सकता है और लोगों की समृद्धि सुनिश्चित कर सकता है। वास्तव में सरपंच वह नींव हैं, जिस पर लोकतंत्र का स्तंभ खड़ा है, जिसके कारण वे समाज का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।"
मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों के स्तर पर समस्याओं को जानने के लिए ये लोक मिलनियाँ अनूठी पहल हैं। उन्होंने कहा कि अनुदानों की कोई कमी नहीं है, लेकिन गांवों में इनका उपयोग सही और ईमानदारी से होना चाहिए। उन्होंने कहा, "आरोप किसी पर भी लगाए जा सकते हैं, लेकिन सही सरपंच ही गांवों के विकास का धुरा होते हैं। पहले पिछली सरकारों का अनुदानों में हिस्सा होता था, जिसके कारण विकास कार्य प्रभावित होते थे। अब गांवों को बड़ी मात्रा में अनुदान आ रहे हैं और वह दिन दूर नहीं जब इस पैसे से राज्य के गांवों की पूरी तरह से कायाकल्प हो जाएगी।"
सरपंचों को विकास कार्यों को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ये फंड इस प्रकार खर्च किए जाने चाहिए कि समाज के हर वर्ग को इसका लाभ मिले। उन्होंने कहा कि सबसे पहले पुस्तकालयों, स्कूलों के निर्माण और सोलर लाइटें लगाने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और उसके बाद गलियों-नालियों को, ताकि गांवों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "राज्य के विकास को तेज करने के लिए यह बहुत आवश्यक है और समय की मांग है ताकि पंजाब को देश का अग्रणी राज्य बनाया जा सके।"
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि गांवों की पंचायतें लोकतांत्रिक प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण अंग हैं और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में सहायक रही हैं। उन्होंने दोहराया कि उनकी सरकार सरपंचों को हर संभव सहायता और सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है क्योंकि वे संपूर्ण ग्रामीण विकास की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंचायतें और सरपंच राज्य सरकार की वास्तविक आँखें और कान हैं क्योंकि वे जमीनी स्तर पर जनता से अच्छी तरह से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा, "पंचायतों को लोकतंत्र की नींव के रूप में जाना जाता है क्योंकि उनके पास अपार शक्ति होती है और उनके फैसलों को पूरा गांव सम्मान से मानता है।"
उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने सरपंचों को यह ताकत दी है और उनके हितों की रक्षा करना और उनकी उम्मीदों पर खरा उतरना सरपंचों का मूल कर्तव्य है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ये संस्थाएँ राज्य सरकार की जन-पक्षधर और विकास-उन्मुख योजनाओं के लाभों को जमीनी स्तर तक पहुँचाने के लिए माध्यम के रूप में काम करती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नीतियाँ राज्य सरकार द्वारा बनाई जाती हैं और सरपंच तथा पंच इन्हें जमीनी स्तर पर लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सभी सरपंचों से अपील की कि वे स्वयं को विकास कार्यों के लिए पुनः समर्पित करें और विकास कार्यों तथा सेवाओं की निगरानी पूरी तनदेही से सुनिश्चित करें।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सरपंचों को एक स्पष्ट आह्वान दिया कि वे विकास कार्यों में किसी भी प्रकार के अनुचित हस्तक्षेप से दूर रहें। उन्होंने कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अतीत में गांवों में व्यापक गुटबाजी के कारण कई काम अधूरे रह गए थे।"
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सरपंचों को गांवों में गुटबंदी समाप्त करने को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में बहुमत हासिल करने वाला व्यक्ति या पार्टी विजेता होती है, लेकिन एक बार चुने जाने के बाद सरपंच पूरे गांव का होता है। एक सरपंच को गांव के प्रत्येक निवासी के साथ समान व्यवहार करना चाहिए और निर्णय निष्पक्ष होकर लिए जाने चाहिए।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे कई सरपंच हैं, जिन्होंने अपनी समझदारी और दूरदर्शिता से अपने गांवों की तस्वीर बदल दी है।
सर्वसम्मति से पंचायतों का चुनाव करने वाले गांवों का धन्यवाद करते हुए उन्होंने कहा, “इन गांवों ने संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर और एक ओर गांवों में आपसी भाईचारे तथा सौहार्द की भावना को मजबूत किया है तथा दूसरी ओर सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करने के लिए सर्वसम्मति से अपने सरपंच चुने हैं।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने दोहराया कि उनकी सरकार गांवों के समग्र विकास और प्रगति के लिए वचनबद्ध है तथा इस नेक कार्य के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जा रही है। उन्होंने कहा, “सरपंच सरकार और गांवों के बीच एक पुल हैं और उन्हें गांवों के विकास में बड़ी भूमिका निभानी चाहिए।”
उन्होंने सरपंचों से गांवों को स्वच्छ, हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए कड़ी मेहनत करने की अपील भी की ताकि राज्य के पर्यावरण को बचाया जा सके। बैठक में महिला सरपंचों की बड़ी संख्या में मौजूदगी से उत्साहित होकर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि अब समय आ गया है कि महिलाएं देश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
मुख्यमंत्री ने प्रशासन, अर्थव्यवस्था और समाज में महिलाओं की भूमिका के प्रति व्यापक दृष्टिकोण पर जोर देते हुए कहा कि वास्तविक सशक्तिकरण शिक्षा, प्रतिनिधित्व और आर्थिक अवसरों में निहित है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने महिलाओं से निर्णय लेने वाली भूमिकाओं में आगे आने और राज्य के भविष्य को नया स्वरूप देने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत आवश्यक है कि लड़कियां आगे आएं और शिक्षा के माध्यम से स्वयं को सशक्त बनाएं। उन्होंने कहा, “यह देश के व्यापक हित में है, क्योंकि जो महिलाएं घरों और परिवारों का कुशलतापूर्वक संचालन करती हैं, उन्हें देश भी चलाना चाहिए। राज्य सरकार इस नेक कार्य के लिए वचनबद्ध है और इसके लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रही है।”
राजनीति में अधिक से अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को राजनीति में आगे आकर हिस्सा लेना चाहिए ताकि वे निर्णय लेने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बन सकें और समाज में आवश्यक परिवर्तन ला सकें।
उन्होंने कहा कि लड़कियों ने लगभग हर क्षेत्र में लड़कों को पीछे छोड़ दिया है, लेकिन राजनीति अभी भी उनकी पहुंच से दूर है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा, “इस क्षेत्र को लंबे समय से पुरुष प्रधान माना जाता रहा है, लेकिन अब समय आ गया है कि महिलाएं यहां भी अपनी पहचान बनाएं। समानता आधारित समाज की स्थापना और जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए महिलाओं की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। इससे पंजाब को एक प्रगतिशील और समृद्ध राज्य बनाने में मदद मिलेगी।”
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ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਪਿੰਡ ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਧ ਵਿਕਸਤ ਹੋਣਗੇ; ਸਰਪੰਚਾਂ ਨੂੰ ਅੱਗੇ ਹੋ ਕੇ ਬਦਲਾਅ ਦੀ ਅਗਵਾਈ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ: ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ
* ਸਰਕਾਰ ਪਿੰਡਾਂ ਦੇ ਸਰਵਪੱਖੀ ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਵਚਨਬੱਧ ਹੈ ਅਤੇ ਫੰਡਾਂ ਦੀ ਕਦੇ ਵੀ ਕਮੀ ਨਹੀਂ ਆਉਣ ਦਿੱਤੀ ਜਾਵੇਗੀ: ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ
* ਵਿਕਸਤ ਪਿੰਡ ਪੰਜਾਬ ਨੂੰ ਦੇਸ਼ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਧ ਵਿਕਸਤ ਸੂਬਾ ਬਣਾਉਣਗੇ: ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ
* ਸਰਪੰਚਾਂ ਨੂੰ ਫੰਡਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਇਸ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਸਮਾਜ ਦੇ ਹਰ ਵਰਗ ਨੂੰ ਲਾਭ ਮਿਲੇ: ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ
* ਮਹਿਲਾ ਸਰਪੰਚਾਂ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਸੀਮਤ ਨਹੀਂ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਅਤੇ ਕੌਮੀ ਰਾਜਨੀਤੀ ਵਿੱਚ ਅਹਿਮ ਭੂਮਿਕਾ ਨਿਭਾਉਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ: ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ
* ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਨੇ ਬਠਿੰਡਾ ਵਿੱਚ ਸਰਪੰਚਾਂ ਨਾਲ ਕੀਤੀ ਗੱਲਬਾਤ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਕੰਮ ਦੀ ਸ਼ਲਾਘਾ ਕੀਤੀ
ਬਠਿੰਡਾ; 23 ਜੂਨ
ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਨੇ ਅੱਜ ਸਰਪੰਚਾਂ ਨੂੰ ਪੇਂਡੂ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਬਦਲਾਅ ਦੀ ਅਗਵਾਈ ਕਰਨ ਦਾ ਸੱਦਾ ਦਿੱਤਾ ਅਤੇ ਸਪੱਸ਼ਟ ਕੀਤਾ ਕਿ ਪੰਜਾਬ ਨੂੰ ਦੇਸ਼ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਧ ਵਿਕਸਤ ਸੂਬਾ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਸੁਪਨੇ ਨੂੰ ਸਾਕਾਰ ਕਰਨ ਲਈ ਸੂਬੇ ਦੇ ਪਿੰਡ ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਧ ਵਿਕਸਤ ਹੋ ਕੇ ਉਭਰਨੇ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ। ਰਾਮਪੁਰਾ ਫੂਲ ਅਤੇ ਤਲਵੰਡੀ ਸਾਬੋ ਦੇ ਸਰਪੰਚਾਂ ਅਤੇ ਪੰਚਾਂ ਨਾਲ ਗੱਲਬਾਤ ਕਰਦਿਆਂ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਦੁਹਰਾਇਆ ਕਿ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਪਿੰਡਾਂ ਦੇ ਸਰਵਪੱਖੀ ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਵਚਨਬੱਧ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਕਾਰਜ ਲਈ ਫੰਡਾਂ ਦੀ ਕੋਈ ਕਮੀ ਨਹੀਂ ਆਉਣ ਦਿੱਤੀ ਜਾਵੇਗੀ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਪੰਚਾਇਤਾਂ ਨੂੰ ਅਪੀਲ ਕੀਤੀ ਕਿ ਉਹ ਸਰਕਾਰੀ ਫੰਡਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਇਸ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਕਰਨ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਸਮਾਜ ਦੇ ਹਰ ਵਰਗ ਨੂੰ ਲਾਭ ਮਿਲੇ, ਜਦਕਿ ਸਿੱਖਿਆ, ਪੇਂਡੂ ਬੁਨਿਆਦੀ ਢਾਂਚੇ ਅਤੇ ਟਿਕਾਊ ਵਿਕਾਸ ਨੂੰ ਪਹਿਲ ਦਿੱਤੀ ਜਾਵੇ।
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਪਿੰਡਾਂ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਅਤੇ ਸਿੰਚਾਈ ਨਾਲ ਸਬੰਧਤ ਮੁੱਦਿਆਂ ਦੀ ਵੀ ਸਮੀਖਿਆ ਕੀਤੀ ਅਤੇ ਕਿਸਾਨਾਂ ਲਈ ਨਹਿਰੀ ਪਾਣੀ ਦੀ ਸਪਲਾਈ ਯਕੀਨੀ ਬਣਾਉਣ ਅਤੇ ਪੰਜਾਬ ਦੀ ਤਰੱਕੀ ਤੇ ਖ਼ੁਸ਼ਹਾਲੀ ਦੀ ਰਫ਼ਤਾਰ ਤੇਜ਼ ਕਰਨ ਲਈ ਸਰਕਾਰ ਦੀ ਵਚਨਬੱਧਤਾ ਨੂੰ ਦੁਹਰਾਇਆ।
ਸਰਪੰਚ ਮਿਲਣੀ ਦੀਆਂ ਕੁਝ ਝਲਕੀਆਂ ਐਕਸ ਉੱਤੇ ਸਾਂਝੀਆਂ ਕਰਦਿਆਂ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਨੇ ਕਿਹਾ: “ਰਾਮਪੁਰਾ ਫੂਲ ਅਤੇ ਤਲਵੰਡੀ ਸਾਬੋ ਦੇ ਸਰਪੰਚਾਂ ਅਤੇ ਪੰਚਾਂ ਨਾਲ ਮੀਟਿੰਗ ਦੌਰਾਨ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਦੀਆਂ ਪ੍ਰਾਪਤੀਆਂ ਬਾਰੇ ਚਰਚਾ ਕੀਤੀ ਗਈ। ਸਾਰਿਆਂ ਨੇ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਮੈਰਿਟ ਦੇ ਆਧਾਰ 'ਤੇ ਨੌਕਰੀਆਂ ਦੇਣ ਅਤੇ ਸਿੱਖਿਆ ਦੇ ਮਿਆਰ ਨੂੰ ਸੁਧਾਰਨ ਲਈ ਸਰਕਾਰ ਦੇ ਯਤਨਾਂ ਦਾ ਸਵਾਗਤ ਕੀਤਾ। ਪੇਂਡੂ ਵਿਕਾਸ ਅਤੇ ਕਿਸਾਨਾਂ ਲਈ ਨਹਿਰੀ ਪਾਣੀ ਦੀ ਸਪਲਾਈ ਯਕੀਨੀ ਬਣਾਉਣ ਬਾਰੇ ਵੀ ਵਿਚਾਰ-ਵਟਾਂਦਰਾ ਕੀਤਾ ਗਿਆ। ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਅਤੇ ਪ੍ਰਗਤੀ ਦਾ ਇਹ ਸਫ਼ਰ ਨਿਰੰਤਰ ਜਾਰੀ ਰਹੇਗਾ।”
‘ਸਰਪੰਚ ਮਿਲਣੀ’ ਦੌਰਾਨ ਇਕੱਠ ਨੂੰ ਸੰਬੋਧਨ ਕਰਦਿਆਂ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਸੂਬੇ ਵਿੱਚ ਸਭ ਤੋਂ ਔਖੀ ਚੋਣ ਸਰਪੰਚ ਦੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਉਹ ਹੀ ਜ਼ਮੀਨੀ ਪੱਧਰ 'ਤੇ ਲੋਕਾਂ ਨਾਲ ਜੁੜੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ, “ਸਰਪੰਚ ਪਿੰਡ ਦਾ ਮੁਖੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇੱਕ ਚੰਗਾ ਸਰਪੰਚ ਪਿੰਡ ਦੀ ਨੁਹਾਰ ਬਦਲ ਸਕਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਲੋਕਾਂ ਦੀ ਖ਼ੁਸ਼ਹਾਲੀ ਯਕੀਨੀ ਬਣਾ ਸਕਦਾ ਹੈ। ਅਸਲ ਵਿੱਚ ਸਰਪੰਚ ਉਹ ਨੀਂਹ ਹਨ, ਜਿਸ 'ਤੇ ਲੋਕਤੰਤਰ ਦਾ ਥੰਮ੍ਹ ਖੜ੍ਹਾ ਹੈ, ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਉਹ ਸਮਾਜ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਹਿੱਸਾ ਹਨ।”
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪਿੰਡਾਂ ਦੇ ਪੱਧਰ 'ਤੇ ਸਮੱਸਿਆਵਾਂ ਨੂੰ ਜਾਣਨ ਲਈ ਇਹ ਲੋਕ ਮਿਲਣੀਆਂ ਵਿਲੱਖਣ ਪਹਿਲਕਦਮੀ ਹਨ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਗ੍ਰਾਂਟਾਂ ਦੀ ਕੋਈ ਕਮੀ ਨਹੀਂ ਹੈ, ਪਰ ਪਿੰਡਾਂ ਵਿੱਚ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਸਹੀ ਅਤੇ ਇਮਾਨਦਾਰੀ ਨਾਲ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ, “ਦੋਸ਼ ਕਿਸੇ 'ਤੇ ਵੀ ਲਗਾਏ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ, ਪਰ ਸਹੀ ਸਰਪੰਚ ਹੀ ਪਿੰਡਾਂ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਦਾ ਧੁਰਾ ਹੁੰਦੇ ਹਨ। ਪਹਿਲਾਂ ਪਿਛਲੀਆਂ ਸਰਕਾਰਾਂ ਦਾ ਗ੍ਰਾਂਟਾਂ ਵਿੱਚ ਹਿੱਸਾ ਹੁੰਦਾ ਸੀ, ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਵਿਕਾਸ ਕਾਰਜ ਪ੍ਰਭਾਵਿਤ ਹੁੰਦੇ ਸਨ। ਹੁਣ ਪਿੰਡਾਂ ਨੂੰ ਵੱਡੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਗ੍ਰਾਂਟਾਂ ਆ ਰਹੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਉਹ ਦਿਨ ਦੂਰ ਨਹੀਂ ਜਦੋਂ ਇਸ ਪੈਸੇ ਨਾਲ ਸੂਬੇ ਦੇ ਪਿੰਡਾਂ ਦੀ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਕਾਇਆ-ਕਲਪ ਹੋ ਜਾਵੇਗੀ।”
ਸਰਪੰਚਾਂ ਨੂੰ ਵਿਕਾਸ ਕਾਰਜਾਂ ਨੂੰ ਪਹਿਲ ਦੇਣ ਦੀ ਅਪੀਲ ਕਰਦਿਆਂ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਇਹ ਫੰਡ ਇਸ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਖ਼ਰਚ ਕੀਤੇ ਜਾਣੇ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ ਕਿ ਸਮਾਜ ਦੇ ਹਰ ਵਰਗ ਨੂੰ ਇਸ ਦਾ ਲਾਭ ਮਿਲੇ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਲਾਇਬ੍ਰੇਰੀਆਂ, ਸਕੂਲਾਂ ਦੀ ਉਸਾਰੀ ਅਤੇ ਸੋਲਰ ਲਾਈਟਾਂ ਲਗਾਉਣ ਨੂੰ ਪਹਿਲ ਦਿੱਤੀ ਜਾਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਗਲੀਆਂ-ਨਾਲੀਆਂ ਨੂੰ, ਤਾਂ ਜੋ ਪਿੰਡਾਂ ਦਾ ਸਰਵਪੱਖੀ ਵਿਕਾਸ ਯਕੀਨੀ ਬਣਾਇਆ ਜਾ ਸਕੇ। ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਨੇ ਕਿਹਾ, “ਸੂਬੇ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਨੂੰ ਤੇਜ਼ ਕਰਨ ਲਈ ਇਹ ਬਹੁਤ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਅਤੇ ਸਮੇਂ ਦੀ ਲੋੜ ਹੈ ਤਾਂ ਜੋ ਪੰਜਾਬ ਨੂੰ ਦੇਸ਼ ਦਾ ਮੋਹਰੀ ਸੂਬਾ ਬਣਾਇਆ ਜਾ ਸਕੇ।”
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਅੱਗੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪਿੰਡਾਂ ਦੀਆਂ ਪੰਚਾਇਤਾਂ ਲੋਕਤੰਤਰੀ ਪ੍ਰਣਾਲੀ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਅੰਗ ਹਨ ਅਤੇ ਪੇਂਡੂ ਖੇਤਰਾਂ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਵਿੱਚ ਸਹਾਇਕ ਰਹੀਆਂ ਹਨ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੁਹਰਾਇਆ ਕਿ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਸਰਕਾਰ ਸਰਪੰਚਾਂ ਨੂੰ ਹਰ ਸੰਭਵ ਸਹਾਇਤਾ ਅਤੇ ਸਹਿਯੋਗ ਦੇਣ ਲਈ ਵਚਨਬੱਧ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਉਹ ਸਮੁੱਚੇ ਪੇਂਡੂ ਵਿਕਾਸ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਵਿੱਚ ਸਰਗਰਮ ਭੂਮਿਕਾ ਨਿਭਾਉਂਦੇ ਹਨ।
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪੰਚਾਇਤਾਂ ਅਤੇ ਸਰਪੰਚ ਸੂਬਾ ਸਰਕਾਰ ਦੀਆਂ ਅਸਲ ਅੱਖਾਂ ਅਤੇ ਕੰਨ ਹਨ ਕਿਉਂਕਿ ਉਹ ਜ਼ਮੀਨੀ ਪੱਧਰ 'ਤੇ ਜਨਤਾ ਨਾਲ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਜੁੜੇ ਹੋਏ ਹਨ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ, “ਪੰਚਾਇਤਾਂ ਨੂੰ ਲੋਕਤੰਤਰ ਦੀ ਨੀਂਹ ਵਜੋਂ ਜਾਣਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਉਨ੍ਹਾਂ ਕੋਲ ਅਥਾਹ ਸ਼ਕਤੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਫੈਸਲਿਆਂ ਨੂੰ ਪੂਰਾ ਪਿੰਡ ਸਤਿਕਾਰ ਨਾਲ ਮੰਨਦਾ ਹੈ।”
ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪਿੰਡ ਵਾਸੀਆਂ ਨੇ ਸਰਪੰਚਾਂ ਨੂੰ ਇਹ ਤਾਕਤ ਦਿੱਤੀ ਹੈ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਹਿੱਤਾਂ ਦੀ ਰਾਖੀ ਕਰਨਾ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਉਮੀਦਾਂ 'ਤੇ ਖਰਾ ਉਤਰਨਾ ਸਰਪੰਚਾਂ ਦਾ ਮੁੱਢਲਾ ਫ਼ਰਜ਼ ਹੈ। ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਇਹ ਸੰਸਥਾਵਾਂ ਸੂਬਾ ਸਰਕਾਰ ਦੀਆਂ ਲੋਕ-ਪੱਖੀ ਅਤੇ ਵਿਕਾਸ-ਮੁਖੀ ਯੋਜਨਾਵਾਂ ਦੇ ਲਾਭਾਂ ਨੂੰ ਜ਼ਮੀਨੀ ਪੱਧਰ ਤੱਕ ਪਹੁੰਚਾਉਣ ਲਈ ਜ਼ਰੀਏ ਵਜੋਂ ਕੰਮ ਕਰਦੀਆਂ ਹਨ।
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਨੀਤੀਆਂ ਸੂਬਾ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋਂ ਬਣਾਈਆਂ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਸਰਪੰਚ ਤੇ ਪੰਚ ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਜ਼ਮੀਨੀ ਪੱਧਰ 'ਤੇ ਲਾਗੂ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਅਹਿਮ ਭੂਮਿਕਾ ਨਿਭਾਉਂਦੇ ਹਨ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਸਾਰੇ ਸਰਪੰਚਾਂ ਨੂੰ ਅਪੀਲ ਕੀਤੀ ਕਿ ਉਹ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਵਿਕਾਸ ਕਾਰਜਾਂ ਲਈ ਮੁੜ ਸਮਰਪਿਤ ਕਰਨ ਅਤੇ ਵਿਕਾਸ ਕਾਰਜਾਂ ਤੇ ਸੇਵਾਵਾਂ ਦੀ ਨਿਗਰਾਨੀ ਪੂਰੀ ਤਨਦੇਹੀ ਨਾਲ ਯਕੀਨੀ ਬਣਾਉਣ।
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਨੇ ਸਰਪੰਚਾਂ ਨੂੰ ਇੱਕ ਸਪੱਸ਼ਟ ਸੱਦਾ ਦਿੱਤਾ ਕਿ ਉਹ ਵਿਕਾਸ ਕਾਰਜਾਂ ਵਿੱਚ ਕਿਸੇ ਵੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਨਾਜਾਇਜ਼ ਦਖ਼ਲ ਤੋਂ ਦੂਰ ਰਹਿਣ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ, "ਇਹ ਮੰਦਭਾਗਾ ਹੈ ਕਿ ਅਤੀਤ ਵਿੱਚ ਪਿੰਡਾਂ ਵਿੱਚ ਵਿਆਪਕ ਧੜੇਬੰਦੀ ਕਾਰਨ ਕਈ ਕੰਮ ਵਿਚਾਲੇ ਲਟਕ ਗਏ ਸਨ।"
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਸਰਪੰਚਾਂ ਨੂੰ ਪਿੰਡਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਧੜੇਬੰਦੀ ਖ਼ਤਮ ਕਰਨ ਨੂੰ ਪਹਿਲ ਦੇਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ, “ਲੋਕਤੰਤਰ ਵਿੱਚ ਬਹੁਮਤ ਹਾਸਲ ਕਰਨ ਵਾਲਾ ਵਿਅਕਤੀ ਜਾਂ ਪਾਰਟੀ ਜੇਤੂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਪਰ ਇੱਕ ਵਾਰ ਚੁਣੇ ਜਾਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਸਰਪੰਚ ਪੂਰੇ ਪਿੰਡ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ। ਇੱਕ ਸਰਪੰਚ ਨੂੰ ਪਿੰਡ ਦੇ ਹਰ ਨਿਵਾਸੀ ਨਾਲ ਬਰਾਬਰ ਦਾ ਵਿਵਹਾਰ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਫੈਸਲੇ ਨਿਰਪੱਖ ਹੋ ਕੇ ਲਏ ਜਾਣੇ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ।”
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਅਜਿਹੇ ਕਈ ਸਰਪੰਚ ਹਨ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਆਪਣੀ ਸਿਆਣਪ ਅਤੇ ਦੂਰਅੰਦੇਸ਼ੀ ਨਾਲ ਆਪਣੇ ਪਿੰਡਾਂ ਦੀ ਨੁਹਾਰ ਬਦਲ ਦਿੱਤੀ ਹੈ।
ਸਰਬਸੰਮਤੀ ਨਾਲ ਪੰਚਾਇਤਾਂ ਦੀ ਚੋਣ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਪਿੰਡਾਂ ਦਾ ਧੰਨਵਾਦ ਕਰਦਿਆਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ, “ਇਨ੍ਹਾਂ ਪਿੰਡਾਂ ਨੇ ਸੰਕੀਰਨ ਸੋਚ ਤੋਂ ਉੱਪਰ ਉੱਠ ਕੇ ਅਤੇ ਇੱਕ ਪਾਸੇ ਪਿੰਡਾਂ ਵਿੱਚ ਆਪਸੀ ਸਾਂਝ ਤੇ ਭਾਈਚਾਰੇ ਦੀ ਭਾਵਨਾ ਨੂੰ ਮਜ਼ਬੂਤ ਕੀਤਾ ਅਤੇ ਦੂਜੇ ਪਾਸੇ ਸਰਵਪੱਖੀ ਵਿਕਾਸ ਯਕੀਨੀ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਸਰਬਸੰਮਤੀ ਨਾਲ ਆਪਣੇ ਸਰਪੰਚ ਚੁਣੇ ਹਨ।”
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਨੇ ਦੁਹਰਾਇਆ ਕਿ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਸਰਕਾਰ ਪਿੰਡਾਂ ਦੇ ਸਮੁੱਚੇ ਵਿਕਾਸ ਅਤੇ ਤਰੱਕੀ ਲਈ ਵਚਨਬੱਧ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਨੇਕ ਕਾਰਜ ਲਈ ਕੋਈ ਕਸਰ ਬਾਕੀ ਨਹੀਂ ਛੱਡੀ ਜਾ ਰਹੀ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ, "ਸਰਪੰਚ ਸਰਕਾਰ ਅਤੇ ਪਿੰਡਾਂ ਵਿਚਕਾਰ ਇੱਕ ਪੁਲ ਹਨ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਪਿੰਡਾਂ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਵਿੱਚ ਵੱਡੀ ਭੂਮਿਕਾ ਨਿਭਾਉਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ।"
ਉਨ੍ਹਾਂ ਸਰਪੰਚਾਂ ਨੂੰ ਪਿੰਡਾਂ ਨੂੰ ਸਾਫ਼-ਸੁਥਰਾ, ਹਰਿਆ-ਭਰਿਆ ਅਤੇ ਪ੍ਰਦੂਸ਼ਣ ਮੁਕਤ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਸਖ਼ਤ ਮਿਹਨਤ ਕਰਨ ਦੀ ਅਪੀਲ ਵੀ ਕੀਤੀ ਤਾਂ ਜੋ ਸੂਬੇ ਦੇ ਵਾਤਾਵਰਨ ਨੂੰ ਬਚਾਇਆ ਜਾ ਸਕੇ। ਮੀਟਿੰਗ ਵਿੱਚ ਮਹਿਲਾ ਸਰਪੰਚਾਂ ਦੀ ਵੱਡੀ ਗਿਣਤੀ ਵਿੱਚ ਮੌਜੂਦਗੀ ਤੋਂ ਉਤਸ਼ਾਹਿਤ ਹੋ ਕੇ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਹੁਣ ਸਮਾਂ ਆ ਗਿਆ ਹੈ ਕਿ ਔਰਤਾਂ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਰਾਜਨੀਤੀ ਵਿੱਚ ਅਹਿਮ ਭੂਮਿਕਾ ਨਿਭਾਉਣ।
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਪ੍ਰਸ਼ਾਸਨ, ਆਰਥਿਕਤਾ ਅਤੇ ਸਮਾਜ ਵਿੱਚ ਔਰਤਾਂ ਦੀ ਭੂਮਿਕਾ ਲਈ ਵਿਆਪਕ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀਕੋਣ 'ਤੇ ਜ਼ੋਰ ਦਿੰਦਿਆਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਅਸਲ ਸ਼ਕਤੀਕਰਨ ਸਿੱਖਿਆ, ਪ੍ਰਤੀਨਿਧਤਾ ਅਤੇ ਆਰਥਿਕ ਮੌਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਹੈ।
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਨੇ ਔਰਤਾਂ ਨੂੰ ਫੈਸਲੇ ਲੈਣ ਦੀ ਭੂਮਿਕਾ ਵਿੱਚ ਅੱਗੇ ਆਉਣ ਅਤੇ ਸੂਬੇ ਦੇ ਭਵਿੱਖ ਨੂੰ ਨਵਾਂ ਰੂਪ ਦੇਣ ਦੀ ਅਪੀਲ ਕੀਤੀ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਇਹ ਬਹੁਤ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿ ਲੜਕੀਆਂ ਅੱਗੇ ਆਉਣ ਅਤੇ ਸਿੱਖਿਆ ਰਾਹੀਂ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਮਜ਼ਬੂਤ ਕਰਨ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ, “ਇਹ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਵੱਡੇ ਹਿੱਤ ਵਿੱਚ ਹੈ, ਕਿਉਂਕਿ ਜੋ ਔਰਤਾਂ ਘਰਾਂ ਅਤੇ ਪਰਿਵਾਰਾਂ ਨੂੰ ਕੁਸ਼ਲਤਾ ਨਾਲ ਸੰਭਾਲਦੀਆਂ ਹਨ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਦੇਸ਼ ਵੀ ਚਲਾਉਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ। ਸੂਬਾ ਸਰਕਾਰ ਇਸ ਨੇਕ ਕਾਰਜ ਲਈ ਵਚਨਬੱਧ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਕੋਈ ਕਸਰ ਬਾਕੀ ਨਹੀਂ ਛੱਡ ਰਹੀ ਹੈ।”
ਸਿਆਸਤ ਵਿੱਚ ਵੱਧ ਤੋਂ ਵੱਧ ਸ਼ਮੂਲੀਅਤ ਨੂੰ ਉਤਸ਼ਾਹਿਤ ਕਰਦਿਆਂ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਔਰਤਾਂ ਨੂੰ ਰਾਜਨੀਤੀ ਵਿੱਚ ਅੱਗੇ ਆ ਕੇ ਹਿੱਸਾ ਲੈਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਜੋ ਉਹ ਫੈਸਲੇ ਲੈਣ ਵਿੱਚ ਸਰਗਰਮ ਭਾਈਵਾਲ ਬਣ ਸਕਣ ਅਤੇ ਸਮਾਜ ਵਿੱਚ ਲੋੜੀਂਦੀ ਤਬਦੀਲੀ ਲਿਆ ਸਕਣ।
ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਲੜਕੀਆਂ ਨੇ ਲਗਪਗ ਹਰ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਲੜਕਿਆਂ ਨੂੰ ਪਛਾੜ ਦਿੱਤਾ ਹੈ, ਪਰ ਰਾਜਨੀਤੀ ਅਜੇ ਵੀ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਪਹੁੰਚ ਤੋਂ ਦੂਰ ਹੈ। ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਨੇ ਆਪਣੀ ਗੱਲ ਖ਼ਤਮ ਕਰਦਿਆਂ ਕਿਹਾ, “ਇਸ ਖੇਤਰ ਨੂੰ ਲੰਬੇ ਸਮੇਂ ਤੋਂ ਮਰਦਾਂ ਦੇ ਦਬਦਬਾ ਵਾਲਾ ਮੰਨਿਆ ਜਾਂਦਾ ਰਿਹਾ ਹੈ, ਪਰ ਹੁਣ ਸਮਾਂ ਆ ਗਿਆ ਹੈ ਕਿ ਔਰਤਾਂ ਇੱਥੇ ਵੀ ਮੱਲਾਂ ਮਾਰਨ। ਬਰਾਬਰੀ ਵਾਲੇ ਸਮਾਜ ਦੀ ਸਿਰਜਣਾ ਅਤੇ ਜ਼ਮੀਨੀ ਪੱਧਰ 'ਤੇ ਲੋਕਤੰਤਰ ਨੂੰ ਮਜ਼ਬੂਤ ਕਰਨ ਲਈ ਔਰਤਾਂ ਦੀ ਭਾਗੀਦਾਰੀ ਬਹੁਤ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ। ਇਸ ਨਾਲ ਪੰਜਾਬ ਨੂੰ ਪ੍ਰਗਤੀਸ਼ੀਲ ਅਤੇ ਖ਼ੁਸ਼ਹਾਲ ਸੂਬਾ ਬਣਾਉਣ ਵਿੱਚ ਮਦਦ ਮਿਲੇਗੀ।”